The S-400 Triumph surface to air missile system after deployment at a military base near Kaliningrad, Russia, March 11, 2019, photo by Vitaly Nevar/Reuters

टीका (रैंड ब्लॉग)

रूसी एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली: क्या यह इसके स्टिकर मूल्य जितनी प्रभावशाली है?

पीटर ए, विल्सन (Peter A. Wilson) एवं जॉन वी. पैराचिनी (John V. Parachini)

6 मई 2020

अक्टूबर 2018 में भारतीय रक्षा मंत्रालय ने रूसी एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) के चार रेजिमेंट खरीदने के लिए $5.5 बिलियन का सौदा किया। केवल एक वर्ष बाद, भारत ने सितम्बर 2021 तक पहले रेजिमेंट के रूस से परिनियोजन को शीघ्र पूरा करने के लिए $850 मिलियन का अग्रिम भुगतान किया। लेकिन कई देश इस बात को पूरी तरह से नहीं मानते कि प्रभावी हवाई रक्षा के लिए मिसाइल प्रणाली के केवल एक अंग की नहीं, बल्कि एक नेटवर्क प्रणाली की आवश्यकता होती है। एस-400 का असल रक्षात्मक मूल्य पता करने की लिए ऐसे कुछ अतिरिक्त अंग हैं जो प्रणाली में लागत और जटिलताएं जोड़ते हैं।

यूएस और यूएन अनुमोदन का पालन करने के तरीकों पर अमेरिकी सरकार के विदेशी सहायता प्रशिक्षण का समर्थन करने के लिए रैंड कॉर्पोरेशन ने सम्पूर्ण विश्व में रूस के हथियारों की बिक्री को कवर करने वाले खुले सूत्रों की जांच की है। डेटाबेस में निहित सामग्री से प्राप्त निष्कर्षों में से एक यह है कि दुर्लभ राष्ट्रीय संसाधनों वाले कई देश प्रणालियों को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक अन्य उपकरण तत्वों को पूरी तरह से समझे बिना हथियार प्रणालियाँ खरीदते हैं। इसके अतिरिक्त, वे सभी आवश्यक उपकरणों की संपूर्ण जीवनचक्र लागत की गणना ठीक से नहीं करते हैं; आमतौर पर जीवनचक्र लागत तकरीबन सात साल में असल खरीद लागत से अधिक हो जाती है।

अपनी हवाई रक्षा क्षमताओं को मज़बूत बनाने की इच्छा रखने वाले अन्य राष्ट्रीय सेनाओं की तरह भारतीय सशस्त्र बल को अवश्य ही ज़बर्दस्त वित्तीय एवं तकनीकी चुनौतियों को हल करना चाहिए। भारत अपने पड़ोसियों से विभिन्न प्रकार के प्रक्षेप मिसाइल के खतरों का सामना करता है एवं कोई एक प्रणाली इस जटिल चुनौती को हल नहीं कर सकती। एस-400 की भी, जो उच्च प्रदर्शन उच्च ऊंचाई वाली मिसाइल एयरोस्पेस रक्षा प्रणाली (HIMADS) है, अपनी महत्वपूर्ण कमियां हैं।

एक प्राथमिक स्तर पर, खोज एवं अग्नि नियंत्रण रेडार के लिए एस-400 के देखने का क्षेत्र पृथ्वी के क्षितिज तक सीमित है। इस सामान्य कमी के कारण, क्षितिज के पार अच्छे से देखने के लिए खोज रेडार आमतौर पर ऊँचे मस्तूलों पर रखे जाते हैं। इससे भी अच्छा उपाय रेडारों को विशेष विमान, हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण विमान प्रणाली (AWACS) या "ऐरोस्टैट्स" नामक स्थिर रस्सी से बंधे हुए गुब्बारों पर रखना है। लेकिन क्षितिज के पार सेंसरों के बिना एस-400 एवं दूसरी शक्तिशाली HIMADS प्रणाली क्रूज़ मिसाइलों द्वारा कम ऊंचाई के हमले से असुरक्षित हैं, जो बड़े पैमाने पर एक हवाई रक्षा प्रणाली को पराजित करने की क्षमता रखता है।

मिसाइल हमलों के कई खतरों के प्रति प्रभावी रहने के लिए एस-400 रेजिमेंट्स को AWACS विमान के साथ मज़बूती से एकीकृत होने की आवश्यकता है। एस-400 की संख्या एवं उन लक्ष्यों के प्रकार के आधार पर, जिनकी सुरक्षा उनसे अपेक्षित है, एक सेना को SAM स्थलों को तकरीबन निरंतर कवरेज प्रदान करने के लिए अपनी AWACS बेड़े के आकार को बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है। फिर भी ईंधन और मरम्मत की लागत AWACS विमान के बड़े बेड़े का संचालन करना महंगा बनाती है।

AWACS द्वारा प्राप्त मिसाइल ट्रैकिंग की जानकारी उच्च मूल्य HIMADS की सुरक्षा में तैनात अलर्ट पर लांच किये गए वायु सुरक्षा विमान एवं/या कम दूरी की वायु सुरक्षा प्रणालियों की ओर निर्देशित करना होगा। ये सारी नेटवर्किंग काफी जटिल, गलतियों के प्रति अतिसंवेदनशील, एवं काफी महँगी है।

एक प्रभावी एकीकृत भूमंडल रक्षा तैनात करने की कुल प्रणाली लागत एस-400 प्रणाली की अधिप्राप्ति एवं मरम्मत लागत से कई गुना अधिक होने की संभावना होती है। इन प्रणालियों से युक्त कोई भी देश बड़े पैमाने पर हुई इस प्रकार की परिचालन विफलता के प्रति संवेदनशील होता है, जैसा कि सऊदी सशस्त्र बल ने अनुभव किया था जब सऊदी अरब तेल कंपनी के दो प्रमुख उत्पादन स्थलों पर सूत्रों के अनुसार ईरान के इस्लामिक गणतंत्र या यमन में इसके हौथी सहयोगियों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से क्रूज़ मिसाइल द्वारा आक्रमण किया गया था।

इसके अतिरिक्त, कम ऊंचाई वाली क्रूज़ मिसाइल का ख़तरा ही एकमात्र ख़तरा नहीं है। सऊदी तेल सुविधाओं पर ड्रोन आक्रमण एवं जनरल क़ासिम सुलेमानी की ह्त्या करने के ट्रम्प प्रशासन के निर्णय के प्रतिशोध में इराक में स्थित एक अमेरिकी हवाई क्षेत्र पर प्रक्षेप मिसाइल आक्रमण प्रभावी हवाई रक्षा की अंतर्निहित मुश्किलों के सिर्फ दो उदाहरण हैं। दोनों मामलों में हवाई रक्षा उन जटिल हवाई रक्षा प्रणालियों, जिनका प्रभावी संचालन मुश्किल है, की लागत के एक छोटे से अंश में पराजित हो गयी। ईरान में यूक्रेनियन एयरलाइनर का दुर्घटनावश डूबना इस बात का एक और उदाहरण है कि हवाई रक्षा प्रणालियों का संचालन एवं दुखद गलतियां ना करना कितना मुश्किल है।

लेकिन एक व्यक्तिगत प्रणाली की क्षमता प्रमुख मुद्दा नहीं है। असल मुद्दा यह है कि नागरिक एवं सैन्य नेतृत्व निवेश संबंधी विकल्पों का सामना करते हैं, जो एस-400 खरीदने के निर्णय से कहीं आगे जाता है। प्रभावी बनने के लिए एस-400 का एक अपेक्षाकृत बड़े एकीकृत हवाई एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली में तैनात किया जाना आवश्यक है एवं इसके संचालन के लिए काफी कुशल सैन्य जनबल की आवश्यकता पड़ती है। अन्यथा, यह एक महंगा सैन्य अपव्यय साबित होगा। इन प्रणालियों की पूर्ण लागत एवं जटिलता सैन्य, राजनयिक और वित्तीय समझौते के पूर्ण प्रसार के व्यवस्थित विश्लेषण की मांग करती है। वर्तमान महामारी के बाद हर देश के सामने आने वाले कठिन बजट समझौतों के मद्देनज़र, यह राष्ट्रीय नेतृत्वों का कर्तव्य है कि वे अपने नागरिकों को पूर्ण मूल्यांकन प्रदान करें।


पीटर विल्सन एक अनुबद्ध रक्षा शोधकर्ता हैं एवं जॉन पैराचिनी लाभ-निरपेक्ष, निर्दलीय रैंड कॉर्पोरशन में वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय रक्षा शोधकर्ता हैं।

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